कोरोनावायरस शरीर में रक्त के थक्के जमाकर फेफड़ों को ब्लॉक कर सकता है। यह दावा आयरलैंड के डॉक्टरों ने किया है। कोरोना से पीड़ित 83 गंभीर मरीजों पर हुई स्टडी के दौरान वायरस का एक और खतरा सामने आया है। डबलिन के सेंट जेम्स हॉस्पिटल के डॉक्टरों का कहना है कि यह फेफड़ों में करीब 100 छोटे-छोटे ब्लॉकेज की वजह बन सकता है जो शरीर में ऑक्सीजन का स्तर घटाते हैं और मरीज की मौत भी हो सकती है। शोधकर्ता प्रो. जेम्स ओ-डोनेल का कहना है कि कोविड-19 खास तरह का ब्लड क्लॉटिंग डिसऑर्डर की वजह बनता है जो सीधे तौर पर पहले फेफड़ों पर हमला करता है।
80 फीसदी पहले ही बीमारी से जूझ रहे थे
ब्रिटिश जर्नल ऑफ हेमेटोलॉजी में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक, 83 गंभीर मरीजों में 81 फीसदी यूरोपियन, 12 फीसदी एशियाई, 6 फीसदी अफ्रीकन और एक फीसदी स्पेन के लोग हैं। इन मरीजों की उम्र औसतन 64 साल भी और 80 फीसदी पहले से किसी न किसी बीमारी से जूझ रहे थे। इनमें 60 फीसदी रिकवर हुए थे और 15.7 फीसदी की मौत हो गई थी।
थक्का जमाने वाले डी-डाइमर का स्तर बढ़ा मिला
मरीजों में रक्त के थक्के कितनी जल्दी जमते हैं इसके लिए शोधकर्ताओं ने डी-डाइमर का स्तर चेक किया। डी-डाइमर एक पदार्थ है यह शरीर में जितना ज्यादा होगा रक्त का थक्का जमने का खतरा उतना ही अधिक होगा। रिसर्च में शामिल मरीजों में डी-डाइमर सामान्य से अधिक मात्रा में मिला था। शोधकर्ताओं के मुताबिक, मरीजों के फेफड़ों के असामान्य ब्लड क्लॉटिंग के मामले दिखे जो छोटे-छोटे थक्के जमने की वजह बने थे। इन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया।
कोरोना के हाई रिस्क मरीजों में थक्के के मामले अधिक
शोधकर्ता प्रो. जेम्स ओ-डोनेल के मुताबिक, निमोनिया भी फेफड़ों को प्रभावित करता है लेकिन कोरोना के मरीजों में जिस तरह का संक्रमण फेफड़ों में दिख रहा है वैसा दूसरे लंग्स इंफेक्शन में नहीं देखा गया। फेफड़ों में जमने वाले छोटे-छोटे थक्कों को समझने की कोशिश की जा रही है ताकि बेहतर इलाज किया जा सके। इसके मामले उनमें ज्यादा दिखे हैं जो पहले से हाई-रिस्क में हैं यानी उम्र अधिक है और पहले से बीमारी हैं।
रक्त के थक्के हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ाते हैं
यह रिसर्च अमेरिकी हेल्थ रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें कहा गया था कोरोना पीड़ितों की सर्वाधिक मौत की वजह शरीर में खून में थक्के जमना था। हास्पिटल से डिसचार्ज होने वाले मरीजों में भी ऐसा दिखा गया था। एक अन्य रिसर्च में यह सामने आया कि ऐसे मरीजों में अनियंत्रित रक्त के थक्के हार्ट अटैक और स्ट्रोक के मामले भी बढ़ाते हैं।
चीनी लोगों में ऐसे मामले कम
शोधकर्ताओं का कहना है कि चीनी लोगों में आनुवांशिक अंतर के कारण उनमें रक्त का थक्का जमने के मामले काफी कम होते हैं। यही वजह है कि चीन के मुकाबले यूरोप में कोरोना के काफी गंभीर मामले सामने आए हैं।
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